हिरण्यगर्भा
प्रायः मैं भूमिका लिखने से बचना चाहता हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि वह जितनी लम्बी होती
है, उतनी देर तक पाठक को 'डिटेन' किए रहती है, और यह बेकार की एक बाधा है रचना और सहृदय के
बीच। लेकिन मैंने देखा कि तुलसीदास ने बालकांड का एक बड़ा हिस्सा भूमिका की तरह लिखा और यही
नहीं, उन्होंने 'ऍक्नालिजमेण्ट' भी किए। बहरहाल यह भूमिका बस इसलिए क्योंकि भ्रूण हत्या पर
ये कविताएं कहीं-कहीं कुछ अपरिचित-सी अवधारणाओं का इस्तेमाल करती हैं।
मसलन 'नंगी शाखें'
(बेअर ब्रांचेस) शब्द, जो चीन में ऐसे अविवाहित युवकों के लिए प्रयुक्त होते हैं, जो
लिंगानुपात बिगड़ने से अब परेशानहाल हैं, उनकी मांएं अब पूछती हैं कि 'वो परी कहां से
लाऊं/तेरी दुल्हन किसे बनाऊं।' और चीनी युवक के लिए बात का जवाब यह कहकर देना नामुमकिन हो
गया है कि 'छोरी कोई पसंद न आए मुझको।'
सन् 2020 तक चीन में दो करोड़ 40 लाख वधुओं की
शार्टज होगी। इसका अर्थ है कि इतने युवकों के द्वारा कभी कोई घर-परिवार स्थापित नहीं किया
जा सकेगा। न पत्नी होगी, न बच्चे होंगे। इसलिए 'नंगी शाखों' की संज्ञा उन्हें देकर चीन के
लोक मानस ने एक बहुत ही मार्मिक रूपक 'गुआंग गुन'-गढ़ा है। वेलेरी एम. हड़सन ने तो राज्य की
युद्धातुरता के पीछे भी इन्हीं नंगी शाखों का तर्क रखा है:







